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Railway Negligence : रेलवे की लापरवाही! लोकल ट्रेनें एक्सप्रेस के नाम से चला रहे, किराया तीन गुना ले रहे

अलवर होकर चलने वाली 14 लोकल ट्रेनों में से 7 की श्रेणी बदलकर एक्सप्रेस कर दी गई। इनकी ना तो स्पीड और ना ही स्टॉपज कम हुए, बल्कि किराया तीन गुना तक बढ़ गया।

 

अलवर होकर चलने वाली 14 लोकल ट्रेनों में से 7 की श्रेणी बदलकर एक्सप्रेस कर दी गई। इनकी ना तो स्पीड और ना ही स्टॉपज कम हुए, बल्कि किराया तीन गुना तक बढ़ गया। कोरोना काल बीते 3 साल हो गए, लेकिन अब भी लोकल ट्रेनें एक्सप्रेस के नाम से ही चल रही हैं।

इससे एक ओर जहां रेलवे की जेब भर रही है, वहीं दूसरी ओर गरीब वर्ग पर आर्थिक भार पड़ रहा है। रेलवे की ओर आरस से करोना के बाद मार्च 2021 से रेलवे की ओर से फिर से ट्रेनों का संचालन शुरू किया। तब रेलवे ने अपनी जेब भरने के लिए लोकल ट्रेनों की श्रेणी बदल स्पेशल या मेल/एक्सप्रेस कर दी।

इसका परिणाम यह हुआ कि ट्रेन का किराया तीन गुना तक बढ़ गया। ट्रेनों की श्रेणी बदलने के पीछे उस समय रेलव का उद्देश्य यह था कि ट्रेनों में केवल आवश्यक लोग ही यात्रा करें। ताकि कोराना फैलने से रोका जा सके, लेकिन कोराना काल बीते तीन साल हो गए। सब कुछ सामान्य हो गया। लेकिन रेलवे की ओर से इन ट्रेनों को अभी तक लोकल ट्रेन में नहीं बदला गया। मेल/एक्सप्रेस और सुपरफास्ट की तुलना में लोकल ट्रेन का किराया कम होता है। इसलिए गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार लोकल ट्रेन में यात्रा करना अधिक पसंद करता है।

छोटे स्टेशनों के साधन नहीं मिलते

कोरोनाकाल के बाद बठिंडा-जयपुर ट्रेन का लोकल के स्थान पर श्रेणी बदलकर मेल/एक्सप्रेस कर दी गई। इसके बाद अब इस ट्रेन का अलवर से जयपुर का किराया 35 से बढ़कर 70 रुपए हो गया है। यात्रा करने में 3.55 घंटे का समय लगता है और 20 स्टॉपेज हैं। रानीखेत एक्सप्रेस ट्रेन में अलवर से जयपुर का 70 रुपए किराया लगता है।

यात्रा में 2.31 घंटे का समय लगता है और 4 स्टॉपेज हैं। बठिंडा-जयपुर, जयपुर-हिसार ट्रेन में अलवर से महवा, मालाखेड़ा, ढिगावड़ा, राजगढ़, सुरेर का 10 के स्थान पर 30 रुपए किराया लगता है। भिवानी-मथुरा व अलवर- कोटा ट्रेन से अलवर से गाजिका, ऊंटवाल, रामगढ़, जाडोली का बास का 10 के स्थान पर 30 रुपए किराया लगाया है। जयपुर-बठिंडा, जयपुर-हिसार व मथुरा-भिवानी ट्रेन से अलवर से पडीसल, घाटला, खैरथल, हरसौली व खानपुर अहिर का 10 रुपए के स्थान पर 30 रुपए किराया लगाता है। इस प्रकार इन जगह जाने में तीन गुना अधिक किराया देना पड़ता है।

उत्तर पश्चिम रेलवे जयपुर की सीनियर डीसीएम पूजा मित्तल ने कहा कि कोराना काल के बाद रेलवे की ओर से जिन लोकल ट्रेनों की श्रेणी बदलकर मेल/एक्सप्रेस की गई थी, उन्हें वापस लोकल ट्रेन के रूप संचालन करना निर्णय रेलवे बोर्ड पर निर्भर है। इसके बाद ही उन ट्रेनों में लोकल ट्रेन वाला किराया होगा।
 

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