Rajasthan : 02 महीनों में 20 कंडक्टर ने नौकरी छोड़ी, इनमें से 06 दूसरे विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बने
Rudra News Express Jaipur.
सरकारी बस के कंडक्टर का भले ही किसी समय में रुतबा या ओहदा माना जाता होगा लेकिन अब युवा मजबूरी में भी ये नौकरी नहीं करना चाहते। हालात यह है की नौकरी लगने के एक से 02 महीनों में छोड़ रहे है। हालांकि अच्छे, बड़े पद के अवसर मिलने पर नौकरी छोड़ना स्वाभाविक है लेकिन हैरानी की बात यह है कि कई लोगों ने दूसरे सरकारी विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बनने के लिए भी नौकरी छोड़ी है।
10 से ज्यादा ऐसे जिनके पास दूसरी नौकरी नहीं!
एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो महीनों में राजस्थान में 20 रोडवेज कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दिन। इनमें से 06 ऐसे हैं जिनका सलेक्शन दूसरे सरकारी विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर हुआ है। दो से तीन कंडक्टर्स का शिक्षक, जलदाय विभाग सहित अन्य विभागों में दूसरे पदों पर सलेक्शन होने से नौकरी छोड़ी है। इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि नौकरी छोड़ने वालों में 10 से ज्यादा ऐसे हैं जिन्हें फिलहाल दूसरा कोई सरकारी जॉब नहीं मिला है। ऐसे में उन्होंने नौकरी छोड़ने की वजह आगे की पढ़ाई या व्यक्तिगत पारिवारिक कारण बताए हैं।
छुट्टी कम, काम ज्यादा, सेमी गारमेंट जॉब :
राजस्थान रोडवेज की नौकरी छोड़ने की आखिर वजह क्या हो सकती है? इस सवाल के जवाब में विशेषज्ञ कहते हैं, ये सेमी गवर्नमेंट जॉब है। सप्ताह में 6 दिन काम करना होता है, एक ही दिन छुट्टी मिलती है। त्योहारों पर छुट्टी नहीं मिलती। डे और नाइट शिफ्ट में ड्यूटी करनी पड़ती है। टारगेट के साथ काम का दबाव ज्यादा होता है। निजी बस वालों से प्रतिस्पर्धा में भी कंडक्टर सीधे निशाने पर आते हैं।
दूसरी ओर सरकारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी में काम का दबाव कम होता है। इसमें 5 दिन वर्किंग और 2 दिन वीकली ऑफ मिलता है। छुट्टियां लेने की सुविधा होती है। वेतनमान या लाभ में भी खास अंतर नहीं है। जॉब सिक्योरिटी और पेंशन जैसी सुविधाएं अब तक ज्यादा बेहतर हैं।

