Rajasthan : पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस में बड़ा मिलन- गहलोत-पायलट की जुगलबंदी, ‘परमानेंट इंचार्ज’ की चुटकी!
पंचायत चुनाव की दस्तक के बीच राजस्थान कांग्रेस में बुधवार को एक ऐसा सियासी दृश्य सामने आया, जिसने पार्टी की पुरानी कहानी के सबसे चर्चित किरदारों, अशोक गहलोत और सचिन पायलट को फिर एक साथ सुर्खियों में ला दिया। जयपुर के कांग्रेस वॉर रूम में दोनों की हंसी-मजाक भरी बातचीत के वीडियो सामने आए तो सवाल भी उठा-क्या पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस के दो ध्रुवों के बीच रिश्तों की भाषा बदल रही है?
Rudra News Express Jaipur.
जयपुर का कांग्रेस वॉर रूम। सामने पंचायत चुनाव की चुनौती। एक टेबल पर प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता। और इसी बीच आमने-सामने बैठे राजस्थान की राजनीति के दो सबसे चर्चित चेहरे-अशोक गहलोत और सचिन पायलट। इस बार तस्वीर में न तल्खी थी, न तंज। कैमरे में कैद हुआ तो हंसी-मजाक, मुस्कुराहट और ऐसी सहज बातचीत, जिसने राजस्थान कांग्रेस की पुरानी सियासी कहानी के पन्ने अचानक पलट दिए। यही वजह है कि पंचायत चुनाव से ठीक पहले गहलोत-पायलट की यह ‘जुगलबंदी’ कांग्रेस के भीतर और बाहर चर्चा का विषय बन गई है।

‘पहले आप इनके इंचार्ज थे, अब ये आपके इंचार्ज हैं…:’
वॉर रूम में बातचीत के दौरान अशोक गहलोत ने सचिन पायलट के हालिया राजनीतिक दायित्व पर चुटकी ली। पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के संदर्भ में गहलोत ने सुखजिंदर सिंह रंधावा और पायलट की ओर इशारा करते हुए कहा कि पहले रंधावा पायलट के इंचार्ज थे, अब पायलट उनके इंचार्ज हो गए हैं। बस फिर क्या था सचिन पायलट ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा "गहलोत जी तो हम सबके इंचार्ज हैं। राजस्थान हो, पंजाब हो या उत्तर प्रदेश गहलोत जी तो सबके इंचार्ज हैं।" गहलोत ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया “हम तो परमानेंट इंचार्ज हैं।” इस एक लाइन ने माहौल को ठहाकों में बदल दिया।

तीन वीडियो, एक तस्वीर.. और खूब चर्चा :
बुधवार को सामने आए वीडियो सिर्फ एक बातचीत तक सीमित नहीं रहे। अलग-अलग दृश्यों में गहलोत और पायलट एक-दूसरे के साथ सहज दिखाई दिए। एक वीडियो में दोनों के बीच हंसी-मजाक नजर आया। दूसरे में पंचायत चुनाव की बैठक के दौरान दोनों साथ बैठे और बातचीत करते दिखे। तीसरे वीडियो में प्रेस कॉन्फ्रेंस की ओर जाते समय गहलोत ने पायलट का हाथ पकड़कर उन्हें आगे बढ़ने का इशारा किया। इस दृश्य ने ‘बड़े भाई’ वाले अंदाज की चर्चाओं को भी जन्म दिया। सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में गहलोत और पायलट की साथ बैठी तस्वीर हमेशा सामान्य राजनीतिक तस्वीर नहीं मानी जाती रही है।

कहानी इतनी आसान भी नहीं :
इस सहजता को सीधे-सीधे पुराने मतभेदों का अंत मान लेना जल्दबाजी होगी। साल 2020 का सियासी संकट दोनों नेताओं के रिश्तों का सबसे बड़ा मोड़ था। सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ मानेसर चले गए थे और गहलोत सरकार पर संकट खड़ा हो गया था। उस दौर में दोनों खेमों के बीच बेहद तीखी बयानबाजी हुई।
2022 में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस विधायक दल की बैठक के दौरान पैदा हुआ विवाद भी दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी की याद दिलाता है। यहां तक कि जून 2026 में भी गहलोत ने 2020 की घटनाओं और पायलट की भूमिका को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी की थी। पायलट ने बाद में गहलोत की टिप्पणियों को अपेक्षाकृत नरम अंदाज में लिया था।इसलिए अक्टूबर 2026 की यह तस्वीरें इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके बीच की राजनीतिक पृष्ठभूमि बेहद लंबी और जटिल रही है।

असली टाइमिंग पंचायत चुनाव की :
कांग्रेस बुधवार को पंचायत चुनाव के लिए उम्मीदवार चयन, स्थानीय मुद्दों और चुनावी रणनीति पर बैठक कर रही थी। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने जिला स्तर के नेताओं को स्थानीय नेताओं, विधायकों और सांसदों के साथ समन्वय कर उम्मीदवार चयन करने पर जोर दिया है। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव चार चरणों में 22 अक्टूबर से 16 नवंबर के बीच होने हैं। यानी कांग्रेस के सामने अब विधानसभा जैसी बड़ी बहस नहीं, बल्कि गांव, पंचायत समिति और जिला परिषद की जमीन पर संगठन की परीक्षा है। पंचायत चुनाव में संगठन की सबसे बड़ी जरूरत होती है-स्थानीय स्तर पर तालमेल। ऐसे में गहलोत और पायलट की एक साथ सहज तस्वीर का राजनीतिक महत्व अपने आप बढ़ जाता है।
क्या पुराने गिले-शिकवे पीछे छोड़ दिए?
कांग्रेस के भीतर इसे लेकर दो तरह की व्याख्याएं हो सकती हैं। पहली-दोनों नेताओं ने बदलते राजनीतिक दौर में व्यक्तिगत टकराव से ऊपर उठकर संगठन को प्राथमिकता देने की कोशिश की है। दूसरी-राजनीति में कैमरे के सामने सहज दिखना और संगठन के भीतर वास्तविक राजनीतिक समीकरण बदलना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। इसलिए फिलहाल इन तस्वीरों को रिश्तों में ‘बर्फ पिघलने’ का संकेत कहने से ज्यादा सुरक्षित यह कहना होगा कि दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक संवाद का अंदाज इस समय पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सहज दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस के लिए यह तस्वीर क्यों जरूरी?
हाल के नगर निकाय चुनावों के बाद कांग्रेस के सामने संगठनात्मक चुनौतियां भी सामने आई हैं। पार्टी ने क्रॉस वोटिंग और स्थानीय निकाय चुनावों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए समिति बनाई है। ऐसे माहौल में पंचायत चुनाव से पहले पार्टी के शीर्ष राजस्थान नेताओं का एक मंच पर दिखाई देना संगठन को एकजुटता का संदेश देने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

