राजस्थान में निकाय चुनाव का बड़ा बदलाव: संतान संबंधी रोक हटाई, पार्षद की खर्च सीमा 3.5 लाख
309 नगरीय निकायों में दो चरणों में मतदान
Rudra News Express Jaipur- Bikaner.
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव-2026 को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति भी नगर निकाय चुनाव लड़ सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने बुधवार को 309 नगरीय निकायों के आम चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं शामिल हैं। चुनाव दो चरणों में होंगे। सदस्य पदों के लिए मतदान 9 और 11 सितंबर को तथा मतगणना 14 सितंबर को होगी।
संतान संबंधी पात्रता को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 में किया गया है। 25 मार्च 2026 की राजपत्र अधिसूचना के जरिए नगरीय निकाय चुनाव में संतान संबंधी प्रावधान हटा दिए गए हैं। इसका सीधा अर्थ है कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर अब किसी अभ्यर्थी को निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं माना जाएगा। आयोग ने इस संबंध में सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
1.44 करोड़ से अधिक मतदाता करेंगे मतदान :
इन चुनावों में 309 नगरीय निकायों के 1,44,03,853 मतदाता मतदान करेंगे। इनमें 73,98,415 पुरुष, 70,04,927 महिला और 511 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। नगर निगम जयपुर में सर्वाधिक 24,20,839 मतदाता हैं, जबकि नगरपालिका इन्द्रगढ़ में सबसे कम 4,744 मतदाता हैं।
वर्ष 2019 में 196 नगरीय निकायों में 1,13,19,864 मतदाता थे। इस बार निकायों की संख्या बढ़ने के साथ मतदाताओं की संख्या में 27.24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
9 और 11 सितंबर को वोटिंग :
सदस्य पदों के लिए 27 अगस्त को लोक सूचना जारी होगी। नामांकन की अंतिम तारीख 31 अगस्त, संवीक्षा 1 सितंबर और नाम वापसी 3 सितंबर तक होगी। चुनाव चिह्न 4 सितंबर को आवंटित किए जाएंगे।
पहले चरण का मतदान 9 सितंबर और दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को होगा। दोनों दिन सुबह 7 से शाम 6 बजे तक मतदान होगा। दोनों चरणों की मतगणना 14 सितंबर को होगी।
इसके बाद अध्यक्ष पद के लिए 15 सितंबर को प्रक्रिया शुरू होगी। अध्यक्ष पद का मतदान 21 सितंबर को सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक होगा और मतदान समाप्त होते ही मतगणना होगी। उपाध्यक्ष का निर्वाचन 22 सितंबर को होगा।
10,245 वार्ड, 16,465 मतदान केन्द्र :
नए परिसीमन के बाद निकाय चुनाव में वार्डों की संख्या 2019 के 7,500 से बढ़कर 10,245 हो गई है। इसी तरह मतदान केन्द्रों की संख्या 10,153 से बढ़कर 16,465 हो गई है। यानी वार्डों में 36.6 प्रतिशत और मतदान केन्द्रों में 62.16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
ईवीएम से होगा मतदान :
नगरीय निकाय चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे। अलवर, भरतपुर, जयपुर, जोधपुर और कोटा जिलों में भारत निर्वाचन आयोग की एम-3 मॉडल ईवीएम का उपयोग होगा। अन्य जिलों में राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान और मध्यप्रदेश की मल्टी पोस्ट सिंगल वोट/मल्टी पोस्ट मल्टी वोट मॉडल की मशीनें इस्तेमाल की जाएंगी।
1.15 लाख कर्मचारी, करीब 99 हजार पुलिसकर्मी :
चुनाव प्रक्रिया में मतदान, मतगणना और अन्य कार्यों के लिए करीब 1,15,255 कार्मिक लगाए जाएंगे। वहीं कानून-व्यवस्था के लिए लगभग 98,790 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। चुनाव की निगरानी के लिए जिलों में पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे और आयोग व जिला स्तर पर 24x7 नियंत्रण कक्ष काम करेंगे।
पार्षद प्रत्याशियों के लिए खर्च सीमा तय :
चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों के चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा भी निर्धारित की है।
- नगर निगम पार्षद: 3.50 लाख रुपए
- नगर परिषद पार्षद: 2.50 लाख रुपए
- नगरपालिका सदस्य: 1.50 लाख रुपए
प्रत्याशियों को चुनाव परिणाम घोषित होने के 15 दिन के भीतर निर्धारित प्रारूप में चुनाव खर्च का पूरा विवरण जमा कराना होगा।
लाउडस्पीकर और वाहनों पर भी नियंत्रण :
चुनाव प्रचार के लिए लाउडस्पीकर चलाने के लिए सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति जरूरी होगी। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पर पूरी तरह रोक रहेगी। प्रचार वाहनों के लिए भी सीमा तय की गई है और संबंधित रिटर्निंग अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
ये तारीखें रखें याद :
- लोक सूचना : 27 अगस्त, चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत
- मतदान : 9 सितंबर, प्रथम चरण
- मतदान : 11 सितंबर, द्वितीय चरण
- मतगणना : 14 सितंबर, इसी दिन परिणाम जारी
- अध्यक्ष चुनाव : 21 सितंबर|
- उपाध्यक्ष चुनाव : 22 सितंबर
आचार संहिता लागू:
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित नगरीय निकाय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। पहले से जारी कार्यादेश और चल रहे विकास कार्य जारी रह सकेंगे, लेकिन नई योजनाओं, नए विकास कार्यों और नए कार्यादेश पर रोक रहेगी।

