Bheru singh Shekhawat को 103वीं जयंती पर राजस्थान ने किया नमन, राज्यपाल-मुख्यमंत्री सहित दिग्गजों ने श्रद्धांजलि दी!
Rudra News Express Jaipur.
देश की राजनीति में अलग पहचान बनाने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति और पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की 103वीं जयंती पर राजस्थानभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। जयपुर के विद्याधर नगर स्थित स्मृति स्थल पर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि कर ‘बाबोसा’ को नमन किया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने शेखावत के परिजनों से मुलाकात भी की। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, सांसद मदन राठौड़, सतीश पूनिया और पूर्व विधायक नरपत सिंह राजवी सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे शेखावत : देवनानी
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शेखावत के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन जनसेवा, सुशासन और लोककल्याण के प्रति समर्पित रहा। राजस्थान के विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में शेखावत का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके विचार, आदर्श और जनकल्याणकारी दृष्टिकोण समाज तथा भावी पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे। शेखावत सार्वजनिक जीवन में समर्पण, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा के प्रेरणादायी उदाहरण हैं।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में पुष्पांजलि :
जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजेय कुमार, राष्ट्रीय मंत्री रोहन गुप्ता सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

अमिट पहचान छोड़ गए ‘बाबोसा’ :
गौरतलब है कि भैरोंसिंह शेखावत राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री रहने के साथ-साथ देश के उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचे। प्रदेश की राजनीति में उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, संगठनात्मक भूमिका और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें विशिष्ट पहचान मिली। उनकी 103वीं जयंती पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में नेताओं ने उनके योगदान को याद किया। स्मृति स्थल पर पुष्पांजलि से लेकर भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम तक, ‘बाबोसा’ के प्रति सम्मान और उनके सार्वजनिक जीवन की विरासत को स्मरण करने का भाव प्रमुख रहा।

