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Ruparel River Revived : राजस्थान की रूपारेल नदी होगी पुनर्जीवित, सिंचाई विभाग ने तैयार की डीपीआर 

राजस्थान में सिंचाई व पीने के पानी उपलब्ध करवाने के लिए सरकार की तरफ से वर्षों से बंद पड़ी नहरों को पुनर्जीवित करने का काम किया जा रहा है।
 

राजस्थान में सिंचाई व पीने के पानी उपलब्ध करवाने के लिए सरकार की तरफ से वर्षों से बंद पड़ी नहरों को पुनर्जीवित करने का काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजस्थान सरकार की तरफ से रुपारेल नदी को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। इस योजना को लगभग सिरे चढ़ाया जा चुका है। रूपारेल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से ड्रोन सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है।

इस सर्वे में नदी के प्रवाह क्षेत्र, कैचमेंट एरिया, जलधारण क्षमता, अतिक्रमण, संभावित जल संरचनाओं और पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किया गया है। सर्वे करने वाली एजेंसी शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट सिंचाई विभाग को सौंपेगी। डोन सर्वे के जरिए पहली बार रूपारेल नदी के बहाव और उसकी वर्तमान स्थिति का सटीक और वास्तविक चित्र सामने आएगा।

इस रिपोर्ट के आधार पर नदी को सालभर जलयुक्त रखने की योजना तैयार की जाएगी। रूपारेल नदी का उद्‌गम सरिस्का क्षेत्र की उदयनाथ पहाड़ियों से होता है और इसकी कुल लंबाई करीब 104 किमी है। ड्रोन सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है, जो 15 फरवरी तक पूरी होने की संभावना है। इस डीपीआर में सात विभाग मिलकर सहयोग करेंगे।

इनमें सिंचाई विभाग के साथ कृषि, उद्यानिकी (होर्टिकल्चर), वन विभाग, वाटरशेड, भूजल और पंचायतीराज विभाग शामिल हैं। डीपीआर में नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पुनर्जीवित करने, वर्षा जल संग्रहण, छोटे एनीकट, चेकडैम, रिचार्ज स्ट्रक्चर, सिल्ट की सफाई और नदी के किनारों के संरक्षण जैसे बिंदुओं को शामिल किया जाएगा। डीपीआर के अनुमोदन के बाद नदी के बहाव क्षेत्र में किए गए अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
 

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