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राजस्थानी का पहला उत्तर आधुनिक उपन्यास ' गवाड़ ' अब मराठी में आया, चार भाषाओं में पहले हो चुका अनुवाद, दो भाषाओं में और हो रहा

 

RNE Special.

दो भाषाओं के मध्य सेतु बनाने का काम साहित्य की अनुवाद विधा करती है। राजस्थानी में तो दूसरी भाषाओं से अनुदित होकर अनेक कृतियां आई है, मगर राजस्थानी की कृतियां दूसरी भाषाओं में कम ही जाती है। अब यह कमी भी दूर हो रही है।

मधु आचार्य ' आशावादी ' लिखित राजस्थानी का पहला उत्तर आधुनिक उपन्यास ' गवाड़ ' 5 भारतीय भाषाओं के बाद अब अनुदित होकर मराठी में भी आ गया है। इस चर्चित उपन्यास का मराठी में अनुवाद चर्चित अनुवादक, मराठी लेखक गीतेश शिंदे ने किया है। जो अनेक अन्य भाषाओं की कृतियां मराठी में अनुदित कर चुके है। उन्होंने इसे उत्तर आधुनिकता का श्रेष्ठ उपन्यास बताया। उनका मानना है कि ऐसे उपन्यास अन्य भारतीय भाषाओ में न के बराबर लिखे गए है। उनके अनुवाद को साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ने प्रकाशित किया है।

मधु आचार्य ' आशावादी ' का यह ' गवाड़ ' उपन्यास इससे पहले हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी में अनुदित होकर छप चुका है। आने वाले समय में यह उपन्यास गुजराती और कोंकणी में भी अनुदित होकर प्रकाशित हो रहा है। 

उपन्यास ' गवाड़ ' का हिंदी में डॉ नीरज दइया, अंग्रेजी में सीमा जैन, पंजाबी में डॉ मंगत बादल ने अनुवाद किया है।

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