रिटायर्ड ऑफिसर को डिजिटल अरेस्ट कार 2.12 करोड़ ठगे, 7वां आरोपी महाराष्ट्र से आरोपी गिरफ्तार
Rudra News Express Jaipur- Thane.
राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट कर 2.12 करोड़ ठगने के आरोपी को महाराष्ट्र के ठाणे से गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही 2.12 करोड़ की ठगी के इस प्रकरण में अब तक सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की टीम ने बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के आधार पर यह सफलता हासिल की है।
अधिकारी को ऐसे फंसाया:
जयपुर में रहने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी से व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क किया गया। आरोपियों ने खुद को पुलिस और सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताया। फर्जी दस्तावेज भेजे। वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट रखकर दबाव बनाया और RTGS के जरिए ₹2.12 करोड़ ट्रांसफर करवा लिए।
पुलिस के पास मामला पहुंचा, यूं हुई जांच:
जब अधिकारी को ठगे जाने का अहसास हुआ तो उसने रिश्तेदारों को बताया। पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी आधार पर महाराष्ट्र के ठाणे से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में अब तक कुल सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
क्या है डिजिटल अरेस्ट और कैसे बचें?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। वे वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में होने का भ्रम पैदा करते हैं और जांच या केस से बचाने के नाम पर रुपये ट्रांसफर करवाते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान:
‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई वैध गिरफ्तारी प्रक्रिया नहीं है।
वीडियो कॉल पर सरकारी एजेंसी द्वारा गिरफ्तारी का दावा किए जाने पर भरोसा न करें।
किसी भी वारंट या सरकारी दस्तावेज की संबंधित एजेंसी से स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।
गोपनीयता की शर्त रखकर पैसे मांगने वालों को रकम ट्रांसफर न करें।
कमीशन के लालच में किसी को अपना बैंक खाता, OTP या सिम कार्ड न दें।
ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें और आधिकारिक पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
राजस्थान पुलिस की ओर से जारी साइबर हेल्पडेस्क के नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी जानकारी दे सकते हैं।

