साहित्य अकादेमी पुरस्कार 2024 अर्पण समारोह संपन्न, 23 भाषाओं के रचनाकार हुए सम्मानित
Mar 9, 2025, 13:10 IST
- भाषाई विविधता को बनाए रखना सबसे ज़रूरी- महेश दत्तानी
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में माधव कौशिक ने कहा कि हमें अकादेमी के 70 वर्ष के इतिहास पर गर्व करना चाहिए कि आज हम दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशन समूह में से एक हैं। किसी भी देश की पहचान भाषाई विविधता को यहां संपूर्ण एकता के रूप में देखा जा सकता है । साहित्यकार को हमारे यहां प्रजापति कहने की परंपरा है क्योंकि वह समांतर संसार की रचना करता है। हमारे साहित्यकारों की संवेदना की परिधि बहुत व्यापक है और यह साहित्य उत्सव या यह पुरस्कार अर्पण समारोह भारतीय सृजनात्मकता का उत्सव है। अपने समापन वक्तव्य में साहित्य अकादेमी की उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा ने कहा की रचनाकार एक साधक होता है और अपनी रचना प्रक्रिया में सब कुछ भूल कर कुछ समाज की भलाई के लिए कई रंग बिखेरता है लेकिन उसमें सर्वश्रेष्ठ रंग मनुष्यता का ही होता है। इससे पहले अपने स्वागत वक्तव्य में अकादेमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने कहा कि हर पुरस्कार लेखक को ताकत देता है और एक बड़े पाठक समाज से जोड़ता है। सच्चे साहित्यकार को उनकी सृजन यात्रा में यह पुरस्कार उन्हें नई ऊर्जा देते हैं।
समारोह में 22 साहित्यकारों को पुरस्कृत किया गया । कन्नड भाषा के के लिए पुरस्कृत रचनाकार नहीं आ सके। बंगला भाषा का पुरस्कार घोषित नहीं किया गया था। डोगरी का पुरस्कार उनकी बेटी ने लिया और अंग्रेजी का पुरस्कार उनके प्रतिनिधि ने ग्रहण किया । पुरस्कार अर्पण समारोह के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत प्रख्यात बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया के भतीजे राकेश चौरसिया का बांसुरी वादन प्रस्तुत किया गया।
आज पुरस्कृत रचनाकार थे: - समीर तांती (असमिया),
- अरन राजा बसुमतारी (बोडो),
- (स्वर्गीय) चमन लाल अरोड़ा (डोगरी),इस्तेरीन कीरे (अंग्रेज़ी),
- दिलीप झवेरी (गुजराती),
- गगन गिल (हिंदी),
- के.वी. नारायण (कन्नड),
- सोहन कौल (कश्मीरी),
- मुकेश थळी (कोंकणी),
- महेंद्र मलंगिया (मैथिली),
- के. जयकुमार (मलयाळम्)
- हाओबम सत्यबती देवी (मणिपुरी), सुधीर रसाळ (मराठी),युवा बराल 'अनंत' (नेपाली),
- वैष्णव चरण सामल (ओड़िआ)
- पॉल कौर (पंजाबी),
- मुकुट मणिराज (राजस्थानी),
- दीपक कुमार शर्मा (संस्कृत),
- महेश्वर सोरेन (संताली),
- हूंदराज बलवाणी (सिंधी),
- ए आर वेंकटाचलपति (तमिळ) एवं पेनुगोंडा लक्ष्मीनारायण (तेलुगु)।


