एसएमएस अस्पताल की बड़ी सफलता: सात ट्रेकीयल छल्ले हटाकर 29 वर्षीय युवती को दी नई जिंदगी
RNE Network.
जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के चिकित्सकों ने एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 29 वर्षीय युवती को नया जीवन दिया है। सड़क दुर्घटना के बाद गंभीर ट्रेकीयल स्टेनोसिस से पीड़ित मरीज की मुख्य श्वासनली के सिकुड़े हिस्से को निकालकर सात ट्रेकीयल छल्ले हटाए गए और श्वासनली का सफल पुनर्निर्माण किया गया। राजस्थान में पहली बार हुई इस सर्जरी को चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
सवाई मानसिंह अस्पताल के सर्जरी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए एक अत्यंत दुर्लभ एवं चुनौतीपूर्ण शल्य चिकित्सा को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने 29 वर्षीय युवती की मुख्य श्वासनली (ट्रेकिया) के गंभीर रूप से सिकुड़े हुए हिस्से को निकालकर सात ट्रेकीयल छल्लों को हटाया तथा श्वासनली के दोनों सिरों को सफलतापूर्वक जोड़कर उसे नया जीवन प्रदान किया।
मरीज सुप्यार देवी, निवासी खाजपुरा अजमेर, जनवरी 2024 में एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हुई थीं। दुर्घटना में सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनका ऑपरेशन किया गया और वह करीब एक माह तक कोमा में रहीं। इस दौरान सांस लेने में सहायता के लिए उनके गले में ट्रेकियोस्टोमी की गई थी।
स्वास्थ्य में सुधार के बाद भी सुप्यार देवी को लगातार सांस लेने में परेशानी बनी रही। विभिन्न अस्पतालों में उपचार के बावजूद राहत नहीं मिलने पर उन्हें मई 2026 में जयपुर लाया गया। एसएमएस अस्पताल में विस्तृत जांच के दौरान सीटी स्कैन और वर्चुअल ब्रोंकोस्कोपी से पता चला कि उनकी मुख्य श्वासनली में गंभीर ट्रेकीयल स्टेनोसिस विकसित हो चुका है, जिससे सांस लेने का मार्ग अत्यंत संकरा हो गया था।
इसके बाद 4 जून 2026 को विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मरीज का ऑपरेशन किया। श्वासनली के निचले हिस्से तक फैली सिकुड़न के कारण यह सर्जरी अत्यंत जटिल थी। ऑपरेशन के दौरान मरीज को हार्ट-लंग मशीन के सहारे रखा गया ताकि शरीर में श्वास और रक्त संचार सामान्य बना रहे।
करीब साढ़े चार घंटे तक चली इस सर्जरी में चिकित्सकों ने श्वासनली के गंभीर रूप से प्रभावित हिस्से को हटाया, जिसमें कुल सात ट्रेकीयल छल्ले निकाले गए। इसके बाद श्वासनली के दोनों सिरों को सावधानीपूर्वक जोड़कर उसका पुनर्निर्माण किया गया। ऑपरेशन के दौरान मरीज को चार यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में इस प्रकार की सर्जरी में अधिकतम चार ट्रेकीयल छल्ले ही हटाए जाते हैं, जबकि सात ट्रेकीयल छल्लों को हटाकर सफल पुनर्निर्माण करना अत्यंत दुर्लभ उपलब्धि है। विश्व स्तर पर भी ऐसे मामलों की संख्या बहुत कम है। राजस्थान में इस तरह की सर्जरी पहली बार सफलतापूर्वक की गई है।
चिकित्सकों ने बताया कि श्वासनली के आसपास महत्वपूर्ण नसें और रक्त वाहिनियां होती हैं। ऑपरेशन के दौरान इनमें किसी प्रकार की क्षति होने पर मरीज को बोलने, निगलने और सांस लेने में स्थायी समस्या हो सकती है। यही कारण है कि इस सर्जरी को अत्यंत जटिल और जोखिमपूर्ण माना जाता है।
सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है और वह सामान्य जीवन की ओर लौट रही है। एसएमएस अस्पताल की इस उपलब्धि को प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

