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IMD का अनुमान: अल नीनो के असर से अगस्त में बारिश कम होगी, गर्मी बढ़ेगी

 

 

Rudra News Express New Delhi.

 

 देश में मानसून के दूसरे चरण को लेकर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चिंता बढ़ाने वाला पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार अगस्त 2026 के दौरान देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, जबकि अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। इसका असर कृषि, जलाशयों और खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस बार पहले चरण में भी बारिश कम हुई। अब सावन शुरू होते ही IMD बारिश फिर कम होने का अनुमान जारी किया है।

 

आईएमडी ने शुक्रवार को जारी अपने मासिक आउटलुक में बताया कि अगस्त-सितंबर यानी दक्षिण-पश्चिम मानसून के दूसरे भाग में भी देशभर में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। हालांकि प्रायद्वीपीय भारत, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के उत्तरी हिस्सों तथा पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है। देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने के संकेत हैं।

अगस्त में क्या रहेगा मौसम?

आईएमडी के अनुसार अगस्त महीने में पूरे देश में औसत वर्षा दीर्घावधि औसत (LPA) के 94 प्रतिशत से कम रहने की संभावना है। पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों तथा पूर्वोत्तर के सीमित इलाकों को छोड़कर अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है।

तापमान रहेगा सामान्य से अधिक :

मौसम विभाग का कहना है कि अगस्त में देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य या सामान्य से अधिक रह सकता है। केवल उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों तथा उनसे लगे दक्षिणी प्रायद्वीपीय इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या उससे थोड़ा कम रहने की संभावना जताई गई है।

एल नीनो का असर रहेगा बरकरार :

 

आईएमडी के अनुसार वर्तमान में प्रशांत महासागर में मध्यम श्रेणी का एल नीनो सक्रिय है। मानसून के शेष सीजन के दौरान इसके और मजबूत होने के संकेत मिले हैं। वहीं हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) फिलहाल तटस्थ स्थिति में है, हालांकि सितंबर के दौरान सकारात्मक IOD बनने की संभावना कुछ अंतरराष्ट्रीय जलवायु मॉडल जता रहे हैं।

किसानों की बढ़ सकती है चिंता :

अगस्त खरीफ फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण महीनों में माना जाता है। ऐसे में यदि बारिश सामान्य से कम रहती है और तापमान अधिक बना रहता है, तो वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को आईएमडी द्वारा जारी अल्पकालिक और साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखनी चाहिए।

आईएमडी ने बताया कि वह हर सप्ताह विस्तारित मौसम पूर्वानुमान तथा प्रतिदिन अल्प एवं मध्यम अवधि के मौसम बुलेटिन जारी करता रहेगा, ताकि राज्यों और किसानों को समय पर मौसम संबंधी जानकारी मिल सके।

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