kal ka mausam : हरियाणा में कल-परसों तेज हवाएं चलेंगी, बारिश के साथ ओलावृष्टि की भी संभावना
kal ka mausam 7 April : हरियाणा व एनसीआर में मौसम में एक बार फिर से बदलाव आने वाला है। गेहूं की कटाई के समय मौसम में लगातार बदलाव के चलते किसानों के माथे पर चिंता की लकीर बनी हुई है। लगातार बादलों की आवाजाही हल्की बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की गतिविधियां रुक-रुक कर हो रही हैं। इसकी वजह से सम्पूर्ण इलाके में दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव जारी है। हिसार का अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.3 डिग्री कम है, न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, यह सामान्य से 1.6 डिग्री कम है।
वर्तमान परिदृश्य में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से पिछले दो दिन से हरियाणा-एनसीआर में तेज गति की हवाओं और हल्की बारिश, बूंदाबांदी और कुछ स्थानों ओलावृष्टि की गतिविधियों को दर्ज किया गया। रविवार की सुबह भी कुछ जगहों पर बूंदाबांदी हुई थी। रविवार रात्रि वक यह मौसम प्रणाली हरियाणा-एनसीआर से आगे निकल जाएगी, वैसे ही हरियाणा एनसीआर पर उत्तरी पश्चिमी हवाओं से सम्पूर्ण इलाके में दिन और रात के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी। एक और मौसम प्रणाली 6 अप्रैल रात्रि से सक्रिय होगी। भारतीय मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
दिन और रात के तापमान में गिरावट आएगी
मौसम में एक बार फिर से बदलाव होगा। 6 अप्रैल शाम से ही बादलों की आवाजाही देखने को मिलेगी और रात को और 7-8 अप्रैल के दौरान तेज गति की हवाओं, आंधी-अंधड़ के साथ हल्की से मध्यम बारिश, बूंदाबांदी साथ ही गरज-चमक के साथ एक-दो स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की गतिविधियां होने की संभावना है।
9 अप्रैल को हरियाणा के केवल उत्तरी जिलों पर असर रहेगा उसके बाद जैसे ही मौसम प्रणाली जैसे आगे निकल जाएगी, 10 अप्रैल को दिन और रात के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी। इस मौसम प्रणाली का असर हरियाणा-एनसीआर व दिल्ली पर 7 अप्रैल को ज्यादा रहेगा। भारतीय मौसम विभाग ने सिस्सा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
किसान फिलहाल सिंचाई न करें
यदि फसल कट चुकी है तो उसे तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं। मंडियों में अपनी फसल को खुले में न छोड़ें, तिरपाल का इंतजाम रखें या वेयरहाउस में शिफ्ट करें। बारिश और तेज हवा की संभावना को देखते हुए फिलहाल फसलों में सिंचाई न करें।

