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Rajasthan Vidhansabha : जूली-सीएम भजनलाल की बातचीत के बाद सदन में लौटे कांग्रेस एमएलए, जूली ने माफी मांगी
RNE Jaipur.
राजस्थान विधानसभा में सात दिन से चल रहा गतिरोध आखिरकार गुरुवार शाम को टूट गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पहल कर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित पक्ष-विपक्ष से बात की। इस बातचीत में सर्वसम्मति बनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को सूचना दी गई। सदन में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने गोविंदसिंह डोटासरा की ओर से बोले गये शब्दों और आसन तक पहुंचने की उनकी हरकत के लिए माफी मांगी। नेता प्रतिपक्ष जूली, सीएम भजनलाल, अध्यक्ष देवनानी ने पूरे प्रकरण पर अपनी बात रखी और इसके साथ ही मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने छह विधायकों को बहाल करने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।
जानिये क्या बोले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली:
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, कई दिनों से सदन मंे गतिरोध रहा। उसकी वजह से हम लोग यहां भी धरने पर रहे, बाहर भी धरने पर रहे। हमारी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधीजी पर जिस प्रकार से व्यंग्यात्मक रूप से मंत्रीजी की ओर से टिप्पणी की गई वहां से बढ़ता हुआ विवाद यहां तक पहुंच गया।
धन्यवाद सदन के नेता को जिन्होंने आज इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए वार्ता की और हमें बुलाया। मैं शिकायत भी करना चाहूंगा सदन के नेता महोदय से कि ये ही वार्ता आप चाहते तो चार दिन पहले हो जाती। हमें न तो यहां सोना पड़ता, न सड़कों पर जाना पड़ता।
क्षमा बड़न को चाहिये, छोटन को उत्पात। हम सब लोग आप लोगों से बाहर नहीं है। हम सब लोग आप लोगों से मिलकर ही ये सदन बनता है। यही इसकी खूबसूरती है। उन सत्तापक्ष के विधायकों को धन्यवाद जिन्होंने महसूस किया कि विपक्ष के बिना मजा नहीं आता।
जूली ने ये कांव्यपंक्तियां सुनाई :
‘आओ मिलकर ढूंढ़ ले कोई वजह एक होने की
यूं बिखरे-बिखरे न तुम अच्छे लगतो हो न हम’
और यूं डोटासरा के लिए जूली ने मांगी माफी :
जूली बोले, गतिरोध पहले भी रहे हैं। इससे बड़े-बड़े गतिरोध रहे हैं लेकिन सदन में बातचीत के जरिये सभी गतिरोध को समाप्त किया गया। हमारे माननीय सदस्य गोविंदसिंह डोटासरा की जो आसन के प्रति उनके द्वारा जो टिप्पणी की गई वो आसन की गरिमा के अनुकूल नहीं थी। उसके लिए मैं माफी चाहता हूं। इसमें मुझे कोई संकोच नहीं है।
मैं कहना चाहता हूं कि परंपराएं बनाने के लिये हम लोग आते हैं। अध्यक्ष जी आप मालिक है, आसन सर्वोपरि है। हमेशा हम सब लोगों ने आसन का सम्मान किया है। आसन को सर्वोपरि रखा है। यहां जिस प्रकार का गतिरोध हुआ यह नहंी होना चाहिये था।
जब आपने सर्वदलीय बैठक बुलाई उसी दिन आपसे आग्रह किया था कि हम कभी गतिरोध भी पैदा करें तो आप अपने चैंबर में बुलाकर कहें। सदन चलाना सत्तापक्ष की जिम्मेदारी पहले हैं। बाद मंे हमारी लेकिन दोनों पक्षों की है। मैं अध्यक्षजी आपसे अनुरोध करूंगा कि माननीय सदन के नेता ने जो शुरूआत की है उस पर आप व्यवस्था देवें। इंदिराजी के प्रति जो टिप्पणी की है। उस पर व्यवस्था देवें। मैं चाहूंगा कि आगे गतिरोध नहीं बने इसका हमारी तरफ से हम ध्यान रखें। सत्तापक्ष की तरफ से भी ध्यान रखा जाएं।
उत्तेजना के क्षण आते हैं। सदन बाधित होता है। विशेष रूप से यह जिम्मेदारी मुख्यमंत्रीजी की है। आप सदन के नेता हैं। आपके लिये हम और सत्तापक्ष दोनों बराबर है। आज आगे बढ़कर जो पहल की इसी प्रकार जब भी ऐसी स्थिति होगी आप बुलाएंगे। उस वक्त प्रदेश, राजस्थान, दोनों के हित में जो है वह निर्णय लेंगे। यह घटना सही नहीं थी। इसके लिये हमें खेद है।
देवनानी बोले-माफी मांगों:
पूरे प्रकरण से आहत विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी बोले, डोटासराजी के द्वारा जो अमर्यादित आचरण हुआ, उसके लिये क्षमा?
जूली ने फिर माफी मांगी:
जूली ने कहा, वही बोला है साहब। गोविंदसिंह डोटासरा की वजह से जो आसन तक आये और टिप्पणी की। उसके लिए हमें खेद है। माफी मांगते हैं।
..और सीएम भजनलाल ने यह कहा :
सीएम भजनलाल शर्मा बोले, माननीय सदस्यों से कहना चाहता हूं कि जब हम बातचीत करते हैं, हमारा वाद-विवाद होता है तो कई बात ऐसी होती है जो हम नहीं कहना चाहते लेकिन निकल जाती है। हम इस बात को इतना न खींचे कि सदन बाधित हो, क्योंकि हम एक जिम्मेदार है।
आप सभी सौभाग्यशाली है कि आप चाहे पक्ष मंे हो या प्रतिपक्ष में, आपसे राजस्थान की जनता की बहुत बड़ी उम्मीद और आशा है। जनप्रतिनिधि के प्रति उनके मन में जो भाव, आशा, उम्मीद है, उनका आप थोड़ा सा भी विचार करेंगे तो मेरा और तेरा की बात खत्म हो जाएगी। हम अपने और अपने इगो के लिये नहीं है। हम हैं तो सिर्फ राजस्थान की आठ करोड़ जनता के लिये सदन में आये हैं। मैं कह सकता हूं कि कोई भी माननीय हमारे सदस्य के मुंह से गलत बात निकलेगी तो उन्हें भी नींद नहीं आएगी। पश्चाताप होता है कि हमने जो सदन में बात कही है वह ठीक नहीं है। हम कुछ भी बात कहें सोच विचार कर कहें।
छोटी-सी बात धीरे-धीरे बड़ी हो जाती है। आखिरकार उसे खत्म तो करना ही पड़ता है। हमारा अध्यक्ष हमारे लिये सम्मानीय होता है। हमारा अध्यक्ष सदन चलाने के लिए हमारा प्रमुख होता है। मैं देखता हूं सदन चलता है हमारे साथी कई प्रूफ देते हैंए नियम की जानकारी देते हैं। सबसे बड़ा नियम और सबसे बड़ा संयम यह है कि हम उसकी पालना करें। जोर से हल्ला मचाते हुए एक दिन किसी सुर्खी बनने के लिए…। सदन का समय बहुत कीमती होता है। इसका पूरा खर्चा राजस्थान की जनता वहन करती है।
अध्यक्षजी कहना चाहता हूं कि दो-तीन दिन से सदन में बड़ा व्यवधान था। कई लोगों ने कहा, सदन की कार्यवाही आगे कर दी जाएं। मैंने कहा, सदन राजस्थान की जनता का है। जनता सोचती है कि हमारे बारे मंे विचार होता है। पक्ष हो या विपक्ष हमारे प्रतिनिधि हमारे बारे में सोचते हैं। इसलिये कहना चाहता हूं कि भावावेश में आकर इस तरह की टिप्पणी करना ठीक नहीं। आदमी जब बड़ा होता है तो उसको बड़े के अनुरूप व्यवहार, आचरण बदलना पड़ता है। उसको देखना भी पड़ता है कि किस पद पर हूं, कैसा व्यवहार करना चाहिये।
आगे के लिये भी इतना कहना चाहता हूं कि सभी सदस्य अपने व्यवहार, अपने शब्दों से किसी को किसी तरह आहत करें ये ठीक नहीं है।
हमारे जो भी सदस्य अच्छा बोलते हैं मैं उन्हें फोन करता हूं। मैंने नेता प्रतिपक्ष को भी फोन किया। चाहे कोई भी हो गलत को गलत कहना भी पड़ता है। इस सदन की मर्यादा रखना हम सभी का दायित्व है। अध्यक्षजी ने भी उस दिन कहा, हमारे माननीय मंत्रीजी ने जो शब्द बोले, उनको विलोपित करने का निवेदन करना चाहता हूं।
जनता पूरा देखती है, सबकुछ देखती है। हम जिस उद्देश्य, भाव और भावना से इस सदन मंे आये हैं जनता के उस भाव और भावना को पूरा करना है। हमेशा कहते हैं कि विपक्ष हमारी ताकत है।
..और यूं सामने आया अध्यक्ष देवनानी का दर्द:
अध्यक्ष वासुदेव देवनानी बोले, सदन के नेता माननीय मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता जूलीजी दोनों ने अपनी बात सदन मंे रखी है। वास्तव में ये बातें राजस्थान विधानसभा मंे जो घटित हुई ये बहुत ही गंभीर और चिंतनीय है। जब तक समझ आई है तब से संसद, विधानसभाओं की कार्रवाई देखी है। गतिरोध आते हैं। समाधान मिलते हैं। इस तरह की घटना तो देश की किसी भी विधानसभा में, किसी भी सदस्य ने और वह भी विपक्ष के बड़े नेता ने कभी नहीं की। बार-बार कहा जाता है कि बड़ो को क्षमा और छोटों का उत्पात लेकिन छोटों को उत्पात की भी एक सीमा होती है। सीमाएं लांघ देते हैं तो कष्ट होता है, पीड़ा होती है। गतिरोध के बारे मंे लगातार विपक्ष और मुख्यमंत्रीजी से भी संपर्क मंे था। मैंने कहा, दोनों पक्ष सर्वसम्मति बनाकर मेरे पास लाये और मुझे इसमें सहयोग करने मंे कोई दिक्कत नहीं है।
एक बात जरूर कहना चाहूंगा, जिस दिन ये घटना हुई। जो मंत्रीजी ने कहा, मैंने कहा कि इसको देखकर समाधान करूंगा। इसमें धैर्य रखने की आवश्यकता थी। दो मिनट मंे डेस्क पर आ गये। मेरे लिये निर्णय लेने का भी समय नहीं मिला। इसलिये चाहे इधर से हो या उधर से हो हमेशा अध्यक्ष पर विश्वास होना चाहिये। आसन सर्वोपरि कहते हैं लेकिन कहने से सर्वोपरि नहंी बनता। अपने व्यवहार और आचरण मंे वह सर्वोपरि दिखना चाहिये।
विपक्ष के नेता ने जिन सदस्य के बारे मंे क्षमा मांगी है। आशा करता हूं कि विपक्ष के नेता उनको अपने आचरण मंे परिवर्तन लाने के लिए सुनिश्चित करेंगे। कुछ सदस्य आउट ऑफ कंट्रोल इधर भी हो जाते हैं, उधर भी हो जाते हैं। दोनों पक्ष के नेता अपने-अपने दलों में नियंत्रण नहीं रखेंगे तब तक सदन को चलाना बहुत ही कठिन है। ये टिप्पणियां क्षमा योग्य नहीं है। आपने एक नेता के रूप में माफी मांगी है तो विश्वास जताता हूं कि भविष्य में वे ऐसा न करें। अब कोई भी डायस पर आएगा तो उसके निलंबन का प्रस्ताव लाने की जरूरत नहीं है। निलंबित माना जाएगा।
गर्ग का प्रस्ताव और छह विधायक बहाल :
इसके साथ ही मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने बहाली का प्रस्तव रखने हुए एक कविता की पंक्ति पढ़ी। कहा “दुश्मनी जमकर करो पर इतनी गुंजाइश रखो, जब कभी फिर सामना हो शर्मिंदा न होना पड़े।” गर्ग के प्रस्ताव पर सदन ने मुहर लगाई और 21 फरवरी 2025 को निलंबित किए गए गोविंदसिंह डोटासरा, रामकेश मीणा, अमीन कागजी, जाकिर हुसैन गैसावत, हाकिम अली खां, संजय कुमार को बहाल कर दिया गया।